Kavya Krupa

Kavya Krupa
September 1, 2022
Gyanjivandasji Swami - Kundaldham
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II हरिस्मृतिका हिसाब ! II

कितने हरि भुलाते है, विषय तुमको ज्ञान ?
क्या वो तुम जानते हो, बहुत होता है ज्यान ?।।...०१
शब्द स्पर्श ने कितने, रूप ने कितने ज्ञान।
रस गंध ने कितने तुझे, भुला दिए भगवान ?।।...०२
कर्तुत्व का अहंकार, मान व देहाभिमान।
इन्हों ने कितनी विस्मृति, हरि की कराई ज्ञान ?।।...०३
ऐसे काम क्रोध लोभ, इर्ष्या रु राग द्वेष।
इत्यादि ने भुला दिए, ज्ञान कितने परमेश।।...०४
इसका कभी रखते हो, ज्ञान तुम सच हिसाब ?
सच्चे सच्चा आज तुम, दो मुझे ही जवाब।।...०५
हरि तुम प्रत्यक्ष ही हो, ज्ञान सर्व देशकाल।
परोक्षवत् नहीं रखूँगा, हरिस्मृति कोइ काल।।...०६
प्रत्यक्षवत् ही रखूँगा, जैसे में हुँ साक्षात।
ज्ञान स्मृतिवत् हरि की रखुँ, करुँगा यूँही बात।।...०७

: रचयिता :

प.प.सू द्.श्रीज्ञानजीवनदासजी स्वामी-कुंडलधाम

सं .२०७४, अधिक ज्येष्ठ सुद-२; दि.१७/५/२०१८,

गुरुवार;
५:०५ AM, वडोदरा